जय श्री कामधेनु

भारत में कई प्रकार की गाये पायी जाती हैं | गायो की अलग-अलग नस्ल होती हैं | आज हम आपको गाय की एक नस्ल के बारे में पूर्ण जानकारी देने वाले हैं | आज हम जिस नस्ल के बारे में बताने वाले हैं वह हैं गुजरात की गिर गाय | इसके साथ हम आपको यह भी बताएँगे की भारत मे गिर गाय क्यों डेरी फार्मर्स की पसंद बनी हुई हैं |
गिर गाय भारतीय गाय की नस्ल हैं जो की अपने दुग्ध उत्पादन के लिए प्रसिद्ध हैं | गिर गाय पालकर आप अपना डेरी फार्मिंग बिसनेस खोल सकते हैं, इस पोस्ट में आपको गिर गाय के बारे में संपूर्ण जानकारी दी जाएगी जैसे गिर गाय कितना दूध देती हैं, गिर गाय के दूध के क्या फायदे हैं, गिर गाय कितना चारा खाती हैं, गिर गाय की कीमत क्या हैं आदि | गिर स्वदेशी पशुओं में सबसे अच्छी दुधारू पशुओं में से एक हैं। इस नस्ल की गाय को अनेको नाम से बुलाया जाता हैं, जैसे कि भोडली, देसन, गुजराती, काठियावाड़ी, खोजी, और सुरती | यह गाय नस्ल के प्रजनन क्षेत्र गुजरात के अमरेली, भावनगर, जूनागढ़ और राजकोट जिले शामिल हैं | इसका नाम गिर जंगल क्षेत्र के नाम पर रखा गया हैं।
इस नस्ल की उत्पत्ति गुजरात राज्य के सौराष्ट्र क्षेत्र में हुई हैं | गिर नस्ल के सांड भारी-भरकम सामान भी आसानी से ढो सकते हैं | इस नस्ल के पशु तनाव अवस्था में भी सहनशीलता बनाये रखते हैं | इसकी अनेक योग्यताओं के कारण इस नस्ल के जानवरों को ब्राज़ील,अमेरिका,वेनेजुएला और मेक्सिको जैसे देशो में भेजा जाता हैं | इसे वहां सफलतापूर्वक विकसित किया जा रहा हैं | गिर गायें एक बयांत में 5000 लीटर तक दूध दे सकती हैं | यह बहुत ही ख़ास मवेशी हैं और यह अपना अधिक समय चाट के या स्पर्श करके व्यतित करते हैं | बैल झुण्ड की रक्षा के लिए जाता हैं और पूरा झुण्ड बच्चो की रक्षा करता हैं |यह गाय 12 से 15 साल तक जीवित रह सकते हैं | और अपने जीवनकाल में 6 से 12 बच्चे पैदा कर सकते हैं |

क्या हैं A1 व A2 दूध में अंतर

वैज्ञानिकों का ऐसा दावा हैं कि A2 किस्म का दूध, A1 किस्म के दूध से कई गुणा स्‍वास्‍थ्‍यवर्धक होता हैं। A2 किस्म का दूध देसी नस्‍ल की गाय से प्राप्त होता हैं। इस किस्म की गाय ताजी और हरी घास खाती हैं। साथ ही A2 किस्म का दूध देने वाली गाय सफेद नहीं बल्कि गहरे भूरे रंग की होती हैं। इसमें A1 किस्म के दूध की तुलना में अधिक प्रोटीन और पोषक तत्व होते हैं। इस तरह का दूध डायबिटिज, हृदय रोग एवं न्‍यूरोलॉजीकल डिसऑर्डर से बचाता हैं एवं शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ता हैं। शोधकर्ताओं का यह भी कहना हैं कि लंबे समय तक A1 टाइप का दूध पीने से कई तरह की स्वास्थ्य समस्यांए होने का खतरा भी रहता हैं । केवल दूध के प्रोटीन के आधार पर ही भारतीय गोवंश की श्रेष्ठता बतलाना अपर्याप्त होगा। क्योंकि बकरी, भैंस, ऊँटनी आदि सभी प्राणियों का दूध विष रहित ए2 प्रकार का हैं। भारतीय गोवंश में इसके अतिरिक्त भी अनेक गुण पाए गए हैं। भैंस के दूध के ग्लोब्यूल अपेक्षाकृत अधिक बड़े होते हैं तथा मस्तिष्क पर बुरा प्रभाव करने वाले हैं। आयुर्वेद के ग्रन्थों के अनुसार भी भैंस का दूध मस्तिष्क के लिए अच्छा नहीं, वातकारक (गठिाया जैसे रोग पैदा करने वाला), गरिष्ठ व कब्जकारक हैं। जबकि गो दूग्ध बुद्धि, आयु व स्वास्थ्य, सौंदर्य वर्धक बतलाया गया हैं।

चित्रदीर्धा

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